कुंडलिनी शक्ति जागरण के नुकसान

कुंडलिनी जागरण की अवस्था क्या हैं? | जागरण के फायदें और नुकसान

कुंडलिनी योग गैरमामुली हैं । यह जीवन शक्ति, ऊर्जा, तेज से भरपूर हैं। अगर किसी साधक की एक बार कुंडलिनी शक्ति जागृत हो जाती हैं, तो अगले ही दिन में यह अविश्वसनीय बदलाव ला सकती हैं । इसके अपने

माया क्या हैं? || दुनिया झूट हैं या मन?

माया क्या हैं? || दुनिया झूट हैं या मन?

हमारे धार्मिक ग्रंथों में ज्ञान की विस्तारित बातें लिखी हुई हैं। इनसे मनुष्य जीव आत्म के कल्याण के पथ को चुनने में जागरूक होता हैं । मोक्ष प्राप्त करना जीवात्मा का सर्वोत्तम कल्याण कहां गया हैं। लेकिन मोक्ष को

जीवात्मा किसे कहेंगे? और परमात्मा किसे कहेंगे?

ध्यान में गहरा उतरने से आत्मा का बोध होता हैं जिसे आत्मज्ञान केहेतें हैं । लेकिन आत्मा को इंद्रियों और बुद्धि से नहीं जाना जा सकता, अगर भौतिक संसार की दृष्टि से देखा जाएं तो आत्मा कुछ नहीं हैं।

आत्मा किसे कहते हैं? आत्मा का ज्ञान | आत्मा के असत्य

Aatma kise kahenge

आत्मा शब्द सामने आते ही किसीका चौकन्ना हो जाना स्वाभाविक बात हो गई हैं, इसका कारण समाज में फैली अज्ञानता हैं, लोग आत्मा को लेकर इतने अज्ञान में हैं की वे आत्मा की बात भी नहीं करना चाहते, निश्चित

मन को शांत और नियंत्रित कैसे करें – 8 उत्तम उपाय

मन को शांत और नियंत्रित कैसे किया करें || 8 उत्तम उपाय

मन को शांत और नियंत्रित कैसे करें. अगर मन में लगातार उथल-पुथल होती रहती हैं। तो यह गंभीर समस्या बन सकती हैं, अगर मन को नियंत्रित और शांत न रखा जाएं तो व्यक्ति को तनाव, दुख, भय और क्रोध

नींद और समाधि में क्या अंतर और समानता हैं?

nind aur samadhi mein kya antar hai

नींद और समाधि में समानता भी हैं और ये दोनों अवस्थाएं एक दूसरे से अगल भी हैं। नींद और समाधि में अंतर और समानता को जानते हैं। नींद से तो कोई भी अनजान नहीं हैं समस्त जीव शरीर को

ध्यान में परमात्मा का पहला अनुभव

ध्यान में परमात्मा का पहला अनुभव

ध्यान के द्वारा मन को विलीन कर के परमात्मा के दर्शन करना संभव हैं। जो योगी अभ्यास से ध्यान में उच्चतम सिद्धि प्राप्त करते हैं, उनके लिए परमात्मा में विलीन होना सहज हैं। किंतु अगर परमात्मा के पहले अनुभव

ब्रह्म कौन है, ब्रह्म ज्ञान कैसे प्राप्त होता हैं.

ब्रह्म और परब्रह्म में अंतर | स्वरूप

ब्रह्म कौन हैं? ब्रह्म को कैसे जाने जिसे जाना ही नहीं जा सकता उसे कैसे जाने अगर हम जानते हैं इसके पीछे कारण होते हैं, गुण आकार आदि। लेकिन ब्रह्म निराकार, निर्गुण हैं, तो उसे जानना तो असंभव हैं।

अहम् ब्रह्मास्मि || महावाक्य का अर्थ और तात्पर्य हिन्दी में जानिए

अहम् ब्रह्मास्मि

‘अहम् ब्रह्मास्मि ‘ महावाक्य का तात्पर्य अहम् ब्रह्मास्मि  सनातन का महावाक्य है साथ ही यह उपनिषधों के चार महावाक्यों में से एक हैं, इस महावाक्य का हिंदी अर्थ होता है ‘मैं ब्रह्म हूं’ या मैं शाश्वत सत्य हूं। जब कोई

“ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या” | तात्पर्य

"ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या"

‘ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या’ वाक्य अद्वैत वेदांत दर्शन का सार है। केवल इसका उच्चारण कर इसके महत्व को नहीं जाना जाता बल्कि इसे वास्तविकता में समझने की आवश्कता हैं। इस महावाक्य को वास्तविकता में समझने पर ही जीव स्वयं का