जानिए भगवान को किसने बनाया हैं ? | Bhagwan Ko Kisne Banaya

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Bhagwan Ko Kisne Banaya हम जब भी कोई अनजान वस्तु को देखते है । हमारे मन में प्रश्न आते है, यह क्या है कैसे बना या इसे किसने बनाया होंगा और ज्यादातर उत्तर हमे पता भी चल जाते हैं।

लेकिन इस दुनिया में ऐसे भी कई प्रश्न है जिनके उत्तर नही दिए जा सकते या इन प्रश्नों के उत्तर वो नही है जिन्हे कोई सुनना नही चाहते है इन्ही प्रश्नों में से एक प्रश्न है की  Bhagwan Ko Kisne Banaya होंगा।

भगवान को किसने बनाया

यह प्रश्न मनुष्य के मन में आना साधारण है क्योंकि मनुष्य जानता है की उसे किसने बनाया है, या उसकी उत्पत्ति कैसे हुई हैं। अगर हम मनुष्य के उत्पति का प्रश्न खड़ा करे तो हमे दो तरह के उत्तर मिल सकते है । जो आस्तिक है वो कहेंगे की मनुष्य के साथ सभी जीव और सम्पूर्ण संसार होने की पीछे का कारण भगवान  है, और नास्तिक व्यक्ति यह कह सकता है की हम एवोल्यूशन और प्रकृति के कारण हैं।

अगर हम आस्तिक और नास्तिक दोनों तरह के लोगों से यह प्रश्न पूछे की भगवान को किसने बनाया तो नास्तिक तो यही कहेंगे की भगवान नही होते है तो भगवान के बनने का प्रश्न ही नहीं किया जा सकता और आस्तिक कहेंगे की भगवान को किसने नही बनाया वे ही सबके आदि हैं।

हमे दुनियां के दो तरह के लोगों से दो तरह के उत्तर मिल रहे है, लेकिन इस प्रश्न का सही उत्तर क्या होंगा?

भगवान को किसने बनाया अगर यह प्रश्न आपके भीतर से आता है। तो इसका उत्तर पाने के लिए आपको दुनिया से पूछने की अवश्कता नही है। भगवान को किसने बनाया इसका सही उत्तर भी आपको आपके भीतर से ही प्राप्त होने वाला है।

भगवान को किसने बनाया यह प्रश्न करने वाला आपका मन है । और इस प्रश्न का उत्तर जो प्राप्त चाहता है वो भी मन है, और मन ही वो है जो अपने अंदर भगवान के प्रति समर्पण, श्रद्धा, भक्ति रखकर  भगवान के सगुण रूप को प्रकट करवाता हैं।

या फिर जब मन के भाव से आत्मा तृप्त हो जाती है तब ईश्वर दर्शन देते है। या यू कह लीजिए की आत्मा ही आत्मा को दर्शन देते है । आत्मा ही परम सत्य है और परम सत्य ही परमात्मा हैं।

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निराकार परब्रम्ह कोन हैं?

आप यह तो जानते है की मन को बनाने वाले भगवान है और भगवान को प्रगट करने वाला मन है । तो आपको अब यह प्रश्न तंग कर सकता है। की ये दोनों एक दूसरे का के होने के कारण कैसे हो सकते हैं?

मन ने भगवान के सगुण स्वरूप को अवश्य प्रगट कराया है, लेकिन मन ने परमात्मा को या निराकार परब्रह्म को नही बनाया । भगवान और ब्रह्म में अंतर है भगवान ईश्वर के सगुण रूप को कहां जाता है जो भग (छह ऐश्वर्य) से संपूर्ण है।

निराकार परब्रम्ह वे है, जो हमारी कल्पना से भी परे हैं,  निराकार परब्रम्ह ही संसार के सभी कारणों के कारण है परब्रम्ह से ही सब कुछ उद्भूत है । परब्रम्ह निर्गुण, निर्लेप, निराकार, अचेत, अनंत (योगनिद्रा में , मूर्चित), अनादि और अविनाशी है । धर्म ग्रंथो के दैवी ज्ञान के अनुसार इनके शरीर के एक-एक छिद्र से प्रति पल ब्रम्हांड बनते और लय को प्राप्त होते है सम्पूर्ण सृष्टि परब्रम्ह में समाई हुई है । निराकार परब्रम्ह के तेज मात्र से समस्त संसार में जागरूकता या चेतना हैं। 

निराकार परब्रम्ह का ये प्रकाश ही परमात्मा है, जो सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं । परमात्मा निराकार परब्रह्म के प्रतिनिधि की तरह इस संसार में व्याप्त होकर परब्रह्म के अनुसार वर्तता हैं । निराकार परब्रम्ह ही अनंत सृष्टि के सबसे अंतिम आयाम हैं, यह सम्पूर्ण आयाम ही परब्रम्ह हैं । सनातन में इसी परब्रम्ह को महाविष्णु या सदाशिव कहा जाता है। 

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