ध्यान में परमात्मा का पहला अनुभव

ध्यान में परमात्मा का पहला अनुभव

ध्यान के द्वारा मन और अहंकार को विलीन कर के परमात्मा के दर्शन करना संभव हैं। जो योगी अभ्यास से ध्यान में उच्चतम सिद्धि प्राप्त करते हैं, उनके लिए परमात्मा में विलीन होना सहज हैं। किंतु अगर परमात्मा के पहले अनुभव पर आए तो इसे समझना कई लोगों के लिए कठिन हो जाता हैं। जब … Read more

ध्यान में क्या सोचना चाहिए || ध्यान बीच की बाधा | Dhyan main Kya sochna chahiye?

गहरे ध्यान में कैसे जाएं ? प्रभावशाली उपाय

जो लोग ध्यान की अवस्था नहीं जानते वे ध्यान में क्या सोचना चाहिए पूछते हैं। सबसे पहले तो हमे यह समझना है की ध्यान केवल वह नहीं है जिसे पूरी तैयारी से आसन लगाकर बैठ कर किया जाए। ध्यान एक प्राकृतिक घटना है जो दौड़ते, चलते, बैठते और लेटते भी घट सकती हैं। ध्यान कैसे … Read more

ब्रह्म कौन है, ब्रह्म ज्ञान कैसे प्राप्त होता हैं.

ब्रह्म और परब्रह्म में अंतर | स्वरूप

ब्रह्म कौन हैं? ब्रह्म को कैसे जाने जिसे जाना ही नहीं जा सकता उसे कैसे जाने अगर हम जानते हैं इसके पीछे कारण होते हैं, गुण आकार आदि। लेकिन ब्रह्म निराकार, निर्गुण हैं, तो उसे जानना तो असंभव हैं। ब्रह्म का स्वरूप असल में स्वरूप नहीं हैं, ये सभी स्वरूपों, गुणों से परे हैं। ब्रह्म … Read more

ध्यान कैसे करें? – गहरे ध्यान में प्रवेश करने के प्रभावशाली उपाय

ध्यान के द्वारा न केवल स्वयं का बल्कि जीवन मृत्यु के चक्र से परे परमसत्य तक का भी बोध प्राप्त होता हैं। तथा ध्यान में ऐसे गुण भी है जो किसी चमत्कार से कम नहीं हैं यह आपको स्वस्थ रहने में सहायता करता हैं, बुद्धि को तीव्रता देता हैं इत्यादि। लेकिन ध्यान को लेकर ज्यादातर … Read more

‘हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे राम’ महामंत्र का महत्व (महिमा) और लाभ, अर्थ सहित

‘हरे कृष्ण हरे राम’ महामंत्र | Hare krishna mantra भगवान नाम मंत्र जाप कीर्तन के लिए कोई भी बंधन नहीं होता हैं, नाम जप का बीज चाहे कैसा भी बोए जाएं इसका फल निश्चित मिलता है | जाप कीर्तन सबसे सरल और शक्तिशाली साधना है भौतिकता से मुक्ति पाने और भगवान के परम पद प्राप्ति … Read more

भगवान शिव के नाम के आगे ‘श्री’ क्यों नहीं लगाया नहीं जाता

भगवान शिव के आगे 'श्री' क्यों नहीं लगाया नहीं जाता

भगवान श्रीविष्णु, श्रीकृष्ण, श्रीराम के ‘श्री’ लगाया जाता है, परंतु भगवान शिव के आगे ‘श्री’ को नही लगाया जाता, इसके पीछे का कारण बहुत कम लोग जानते है, इसके पीछे के कारण को इस आलेख में जानिए। भगवान श्री विष्णु, श्रीराम, श्रीकृष्ण के आगे ‘श्री’ क्यों लगाते हैं? भगवान विष्णु, और उनके अवतारों के आगे … Read more

अहम् ब्रह्मास्मि | महावाक्य का गहरा अर्थ और व्याख्या | Aham brahmasmi in hindi

Aham Brahmasmi अहम् ब्रह्मास्मि

‘अहम् ब्रह्मास्मि ‘ महावाक्य का तात्पर्य | Aham brahmasmi in hindi अहम् ब्रह्मास्मि  सनातन का महावाक्य है, यह अद्वैत वेदांत के चार महावाक्यों में से एक हैं, यह विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक यजुर्वेद के बृहदारण्यक उपनिषद से लिया गया हैं। अहम् ब्रह्मास्मि  महावाक्य का हिंदी अर्थ होता है ‘मैं ब्रह्म हूं’ … Read more

“ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या” | तात्पर्य

"ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या"

‘ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या’ वाक्य अद्वैत वेदांत दर्शन का सार है। केवल इसका उच्चारण कर इसके महत्व को नहीं जाना जाता बल्कि इसे वास्तविकता में समझने की आवश्कता हैं। इस महावाक्य को वास्तविकता में समझने पर ही जीव स्वयं का कल्याण करता हैं। इस आलेख में “ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या” महावाक्य को कैसे समझा जाए और इसका … Read more

ब्रह्म और परब्रह्म में अंतर | स्वरूप

ब्रह्म और परब्रह्म में अंतर | स्वरूप

चराचर में व्याप्त चेतन तत्व को शास्त्रों ने ब्रह्म नाम दिया हैं, किंतु परब्रह्म का अर्थ होता है सर्वोच्च ब्रह्म जिससे ब्रह्म और परब्रह्म के बीच अंतर जान पड़ता है। ध्यान का अंतिम लक्ष है ब्रह्म स्वरूप में विलीन हो जाना । ध्यान में उच्च सिद्धि प्राप्त कर ब्रह्म स्वरूप के दर्शन प्राप्त होते हैं। … Read more

परमात्मा का स्वरूप, आत्म में परमात्मा के दर्शन

परमात्मा का स्वरूप, आत्म में परमात्मा के दर्शन

परमात्मा का स्वरूप परमात्मा संपूर्ण जीवों के शरीर के साथ संपूर्ण जगत को धारण करने वाली पवित्र आत्मा हैं, यह परमात्मा केवल एक हैं। यह कण-कण में विराजमान हैं । परमात्मा के बिना इस जगत की कल्पना भी नहीं की जा सकती । बिना इसके कुछ भी संभव नहीं हैं। हम अपनी आस-पास के जगत को … Read more