‘अहम् ब्रह्मास्मि’ महावाक्य का अर्थ और तात्पर्य हिन्दी में जानिए

अहम् ब्रह्मास्मि

‘अहम् ब्रह्मास्मि ‘ महावाक्य का तात्पर्य अहम् ब्रह्मास्मि  सनातन संस्कृति का महावाक्य है, इस महावाक्य का हिंदी अर्थ होता है ‘मैं ब्रह्म हूं’ । जब कोई योगी ध्यान साधना में उच्चतम सिद्धि प्राप्त करता है, वह इस महावाक्य का उद्घोष करता हैं और स्वयं को ब्रह्म कहता हैं। ब्रह्म निर्गुण, निर्लेप, निराकार, सर्वव्यापी, सर्वज्ञ, शाश्वत, परमचैतन्य … Read more

“ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या” | तात्पर्य

"ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या"

‘ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या’ वाक्य अद्वैत वेदांत दर्शन का सार है। केवल इसका उच्चारण कर इसके महत्व को नहीं जाना जाता बल्कि इसे वास्तविकता में समझने की आवश्कता हैं। इस महावाक्य को वास्तविकता में समझने पर ही जीव स्वयं का कल्याण करता हैं। इस आलेख में “ब्राह्मण सत्यम,जगत मिथ्या” महावाक्य को कैसे समझा जाए और इसका … Read more

× How Can I Help You?